पैसों की चीख़ सुनाई नही देती
पर हर वक़्त चीखती चिल्लाती रहती है
मुझें बचाओ मुझें बचाओ...!!
न जाने में कैसे कैसे के हाथों में आ रही हूँ
मेरी वजह से कोई किसी की जान ले रहा है
तो कोई मेरी वजह से किसी की इज्ज़त से खेल रहा है
मेरी ही वजह से अपनों को अपनों का क़ातिल बना दिया है
हर ज़ुल्म में मुझें सामिल कर दिया है
मुझे असहाय गरीबों के काम नही आने दिया है
मुझे अमीरों ने ही अपनी चाल में फांस कर रख दिया है
मैं जिन के पास हूँ पहले से उन्हीं के पास बढ़ती जा रही हूँ
मेरी जिन को जरूरत है उन तक पहुँच नही पा रही हूँ
में कभी कभी ख़ुश होती हूँ कि में अच्छे पढ़े लिखें बड़े लोगों के पास हूँ
लेक़िन जब मुझें किसी की इज्जत और जान लेने में हक़दार बनाते है तब मुझें लगता है क्यों हूँ में
मुझें लोग आँख बंद करके ख़र्च करते है
क्या सही क्या गलत लोग देखते नही है
कभी कभी लगता है कि में शून्य हो जाओ
मानव जिंदगी को शून्य से मिलू
फिर सबकों बराबर मिलू न किसी को ज्यादा न किसी को कम
जितनी ज़रूरत उतना ही मिलू ज़रूरत से ज़्यादा किसी को न मिलू
माना मेरे बग़ैर बजूद नही इंसानों का
पर इंसान मुझें सही काम तो आने दो इंसानों का
में पैसा हूँ खामोश हूँ मै बोलता नही
में भी चीख़ता हूँ चिल्लाता हूँ
पर कोई इंसान सुनता नही।
में पैसा हर ज़ुल्म में सामिल हूँ में
ओर हर सफलता का कारण हूँ में
इंसानों ने मुझें अपने अपने स्वार्थ
के अनुसार उपयोग किया है।
Comments
Post a Comment