जीवन के पड़ाव का बहुत ही दिलचस्प स्टेज जिसे न समझा जा सकता है और न पड़ा जा सकता है, ऐसा समझो यह न समझने वाली dictionary का शब्द है। अट्रैक्शन इसे किस चीज पर निर्भर किया जा सकता है। दिमाक बॉडी या आंखे जो देखती है और मन लुभा जाता है। पर कैसे यह सारा मन का बहम होता है की चाहत ही अट्रैक्शन होता है, अट्रैक्शन ओर चॉइस यह दोनों अलग अलग पहलू है जीवन के चॉइस हमारी पसंद होती है और जो हम पसंद करते है वो हमेसा हमारे साथ रहती है उसे पाने तक ओर उसे पाने के बाद भी मगर अट्रैक्शन एक लुभाने वाली जिज्ञासा है जो दिमाक ओर मन को बंदी बना लेती है और बो जब तक साथ रहती है तब तक वो चीज हासिल नही हो जाती और हासिल होने के बाद वो जिज्ञासा खत्म हो जाती है। अट्रैक्शन जीवन का साथ नही हो सकता वो हमेशा बदलता रहता है, मगर पसंद जीवन की परछाई है, जो जिसे जीवन चलता है वो भी साथ साथ चलती है। जिसे चाहना जीवन भर का संयोग है जो हासिल होने के बाद भी बनी रहती है कभी पसंद खत्म नही होती।
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