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जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना #किसान

जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना
कैसे किसान ने अनाज पैदा किया होगा
और कैसे उस अनाज को खाने योग्य बनाया होगा।

जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना की अगर मिट्टी
को तराश कर किसान ने अनाज पैदा नही किया होता
तो तुम्हारे हाथों का निवाला कैसे बना होता।

जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना कि कैसे रोटी का
टुकड़ा बन तुम्हारे हाथों तक पहुँचाया होगा उसने
जिसने ठीक से पेट भर रोटी भी नही खाया होगा।

जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना
क्यों किसानी जरूरत नही लोगो की
क्यों किसानी करनी हिम्मत नही लोगो की
क्यों चंद किसानों के भरोसे उम्मीद लगी है पेट भरने की
फिर भी क्यों हक ओर इज्ज़त नही किसानों की।

जब तुम रोटी खाओ तो शुक्रिया जरूर अदा
करना उस किसान का जिसने तुम्हारा पेट
भरने के लिए अनाज पैदा किया
ओर खुद पेट भर भोजन भी नही कर सका।

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जीवन के पड़ाव का बहुत ही दिलचस्प स्टेज जिसे न समझा जा सकता है और न पड़ा जा सकता है, ऐसा समझो यह न समझने वाली dictionary का शब्द है। अट्रैक्शन इसे किस चीज पर निर्भर किया जा सकता है। दिमाक बॉडी या आंखे जो देखती है और मन लुभा जाता है। पर कैसे यह सारा मन का बहम होता है की चाहत ही अट्रैक्शन होता है, अट्रैक्शन ओर चॉइस यह दोनों अलग अलग पहलू है जीवन के चॉइस हमारी पसंद होती है और जो हम पसंद करते है वो हमेसा हमारे साथ रहती है उसे पाने तक ओर उसे पाने के बाद भी मगर अट्रैक्शन एक लुभाने वाली जिज्ञासा है जो दिमाक ओर मन को बंदी बना लेती है और बो जब तक साथ रहती है तब तक वो चीज हासिल नही हो जाती और हासिल होने के बाद वो जिज्ञासा खत्म हो जाती है। अट्रैक्शन जीवन का साथ नही हो सकता वो हमेशा बदलता रहता है, मगर पसंद जीवन की परछाई है, जो जिसे जीवन चलता है वो भी साथ साथ चलती है। जिसे चाहना जीवन भर का संयोग है जो हासिल होने के बाद भी बनी रहती है कभी पसंद खत्म नही होती।