जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना
कैसे किसान ने अनाज पैदा किया होगा
और कैसे उस अनाज को खाने योग्य बनाया होगा।
जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना की अगर मिट्टी
को तराश कर किसान ने अनाज पैदा नही किया होता
तो तुम्हारे हाथों का निवाला कैसे बना होता।
जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना कि कैसे रोटी का
टुकड़ा बन तुम्हारे हाथों तक पहुँचाया होगा उसने
जिसने ठीक से पेट भर रोटी भी नही खाया होगा।
जब तुम रोटी खाओ तो ये सोचना
क्यों किसानी जरूरत नही लोगो की
क्यों किसानी करनी हिम्मत नही लोगो की
क्यों चंद किसानों के भरोसे उम्मीद लगी है पेट भरने की
फिर भी क्यों हक ओर इज्ज़त नही किसानों की।
जब तुम रोटी खाओ तो शुक्रिया जरूर अदा
करना उस किसान का जिसने तुम्हारा पेट
भरने के लिए अनाज पैदा किया
ओर खुद पेट भर भोजन भी नही कर सका।
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